Wednesday, February 25, 2026
25.4 C
Delhi

फिल्मों के विलेन्स की पसंद ‘रामपुरी चाकू’की क्या है कहानी?

रामपुरी चाकू (Rampuri Chaku/Knife): नवाबी दौर से ही रामपुर चाकू बनते आ रहे है। यहां चाकू रामपुर की सिर्फ पहचान ही नहीं बल्कि यहां के शिल्प और लोगों की जीविका की भी पहचान है। जब से रामपुर जिला बना उस ज़माने से जिस पैर्टन में चाकू बनाए जाते थे आज भी उसी तरह से बनाए जाते है। साल 2007 में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) ने इसे अल्पसंख्यक बहुल जिले के रूप में मान्यता दी।

चाकूओं के लिए मशहूर ये शहर पहले चीनी और कपास की मिलिंग के लिए भी जाना जाता था। पर जितनी शोहरत रामपुरी चाकू ने इस जगह को दी, वो अपने आप में एक मिसाल है। 100 साल से ज्यादा पुरानी चाकू बनाने की ये कला नवाबों के समय से रामपुर में वास करती आ रही है।

रामपुरी चाकू
रामपुर के चाकू बाजार में दुकान करने वाले शहजाद आलम (Photo: DNN24)

चाइनीज़ चाकू और रामपुरी चाकू में अंतर

शहज़ाद आलम बताते है कि चाकू अलग-अलग तरह के होते है, लेकिन जो सबसे ज्यादा बिकता है वो बटन वाला चाकू है, जो बटन दबाने से खुलता है। आजकल जो बाज़ारों में चाकू बिक रहे है। उन्हें बनाने का तरीका ठीक नहीं होता है जिसकी वजह से वो जल्दी खराब हो जाते है। जो आम चाकू होते है उनके डिजाइन थोड़े आर्किषित करते है। उन चाकूओं को बनाने वाले जल्दी जल्दी डिजाइन बदलते रहते है। इन चाकूओं को मशीनों की मदद से बनाया जाता हैं। अगर चाइनीज चाकू एक बार गिर जाए तो गिरने के बाद तुरंत खराब हो जाते है।

वहीं रामपुर के चाकू की बात जाए तो अगर उन्हें जमीन पर जोर से पटका भी जाए तो तब भी वो खराब नहीं होते है। यह कहना गलत नहीं होगा कि आपकी और मेरी उम्र से भी ज्यादा उस चाकू की उम्र है। रामपुरी चाकू का काम हाथ से होता है इसकी हत्थे पर की गई नक्काशी हाथों से की जाती है। वहीं रामपुरी चाकूओं का पैर्टन हम नहीं बदल सकते है। अगर हम उसको बदल देंगे तो कस्टूमर उसे पसंद नहीं करेगा। देखा जाए चार से पांच सालों में रामुपुरी चाकू की बिक्री बढ़ी है।

रामपुरी चाकू का इतिहास

शहज़ाद आलम ने DNN24 को बताया कि एक बार रामपुर के नवाब ने जर्मनी से एक चाकू मंगवाया, जो नवाब को बहुत पसंद था क्योंकि वह बटन दबाते ही खुल जाता जाता था। नवाब ने अपनी रियासत की बेहद प्रसिद्ध कारीगर बेचा उस्ताद को बुलाकर उसे हूबहू वैसा ही चाकू बनाने को कहा। कारीगर ने हूबहू वैसा ही चाकू बनाया। जर्मनी का चाकू और कारीगर द्वारा बनाया गए चाकू में किसी भी तरह का अंतर नहीं था। इसके बाद से रामपुर चाकू को एक नई पहचान मिली और कारोबार बढ़ता चला गया। 

रामपुरी चाकू
रामपुरी चाकू – World’s Famous Rampuri Chaku (Photo: DNN24)

500 रूपये से लेकर 3 हजार तक चाकू

रामपुर के चाकू में धार नहीं होती है। सिर्फ वो शो के लिए होता है। लोग अपने घरों में सजाने के लिए ले जाते है। शहज़ाद आलम कहते हैं कि “सबसे पहले चाकू के हैंडल को प्लेट को ढालते है। चाकू पर ब्लेड लोहे और स्टील का लगाया जाता है। पीतल की ढलाई की जाती है उसके बाद हैंडल पर नक्काशी होती है। इसकी खासियत यह है कि इसे बनाने में किसी भी तरह की मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसकी कीमत 500 रूपये से शुरू होती है जो 3 हजार ज्यादा भी हो सकती है। बाकी उसकी क्वालिटी पर निर्भर करता है। जिस तरीके का मटेरियल इस्तेमाल किया जाता है।

इस काम को और बढ़ावा देने के लिए हम सरकार का बहुत शुक्रिया करते है। एक अच्छा कारीगर बनने के लिए 10 साल का समय भी लग सकता है और कम से कम 5 साल का समय भी लग सकता है।  कुछ लोग बचपन से ही यह काम कर रहे है उन लोगों को चाकू बनाने के लिए महारथ हासिल है। हम ऑनलाइन सिर्फ छोटे चाकू ही बेच सकते है जिनमे धार नहीं होती है। सरकार ने हमे इसके लिए इज़ाजत दी है।” 

रामपुरी चाकू
DNN24 Journalist with Shahzad Alam, a shopkeeper in Rampur’s knife market (Photo: DNN24)

रामपूरी चाकू को सरकार ने दिया बढ़ावा

जबसे उत्तर प्रदेश सरकार ने रामपुरी चाकूओं पर गौर किया और इसे One District One Product में लेकर आए तबसे इसके कारोबार में बढ़ोत्तरी हुई। और हमने इसे बनाने वाले कारीगर बढ़ा दिए। उसके बाद रामपुरी चाकू को लोग दूर-दूर से खरीदने के लिए आने लगे। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक रामपुर के चाकू को आकर्षण का केंद्र बनाने, उसके इतिहास को बरकरार रखने और पर्यटकों को आर्कषित करने के लिए रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जिले के जौहर चौक पर रामपुरी चाकू का मॉडल लगाया गया है। जो 20 फीट लंबा और करीब साढ़े आठ क्विंटल से ज्यादा वजनी है। दावा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा रामपुरी चाकू है।

ये भी पढ़ें: ‘तहकीक-ए-हिंद’: उज़्बेकिस्तान में जन्मे अल-बीरूनी का हिंदुस्तान की सरज़मीं से ख़ास रिश्ता

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

Hyderabad’s Paigah Tombs: Hidden Architectural Treasure 

The most elaborate burial ground in Hyderabad sits tucked...

India’s Last Urdu Handwritten Newspaper Defies Digital Era

Every evening in Chennai, three calligraphers sit in an...

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib – A Center of Faith, Hope, and Spiritual Peace 

Best of Sadda Punjab “Tegh Bahadur simariye ghar nau nidh...

An Educator Establishes Largest High-Tech Private Library in South Kashmir

Shahid Shafi Itoo envisioned an affordable private library with...

Keep Your Living Space Cool with indoor plants

When temperatures in Delhi touched 46°C last May and...

Topics

Hyderabad’s Paigah Tombs: Hidden Architectural Treasure 

The most elaborate burial ground in Hyderabad sits tucked...

India’s Last Urdu Handwritten Newspaper Defies Digital Era

Every evening in Chennai, three calligraphers sit in an...

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib – A Center of Faith, Hope, and Spiritual Peace 

Best of Sadda Punjab “Tegh Bahadur simariye ghar nau nidh...

An Educator Establishes Largest High-Tech Private Library in South Kashmir

Shahid Shafi Itoo envisioned an affordable private library with...

Keep Your Living Space Cool with indoor plants

When temperatures in Delhi touched 46°C last May and...

Khan Market: Refugee Camp to Global Landmark

Khan Market, Delhi, stands today as one of the...

Assam Tribes Mastered Tea Centuries Before the British

The thick forests of eastern Assam hold a secret...

Manipuri Film Boong Wins Historic BAFTA Award

When Director Lakshmipriya Devi stepped up to accept the...

Related Articles