17-Apr-2024
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इज्तिहाद: इस्लाम धर्म में समय और स्थान के आधार पर कुरान और सुन्नत की व्याख्या

दुर्भाग्य से हाल ही में, धार्मिक प्रतिष्ठानों और दमनकारी सरकारों द्वारा इज्तिहाद के प्रति प्रतिबंध लगाए जाने की घटनाएं हुईं हैं।

इज्तिहाद: इस्लाम धर्म (Islam Religion) में समय और स्थान के आधार पर कुरान और सुन्नत की व्याख्या करने का मतलब है। यह धार्मिक अवधारणा स्वीकृत है और इसकी वैधता कोई अवैधिक नहीं कर सकता। वर्तमान बदलती दुनिया में इज्तिहाद का महत्वपूर्ण रोल है। हालांकि, इबादत और मूल्यों के संबंध में कोई प्रश्न नहीं होता है, लेकिन बदलते समाजिक मामलों में इज्तिहाद की आवश्यकता होती है।

इसकी विशेष महत्त्वता महिलाओं की स्थिति, मुस्लिम समुदायों के संबंध, मुस्लिमों और गैर-मुस्लिमों के संबंध, मुस्लिमों की भूमिका गैर-मुस्लिम समाजों में, और इस्लामी आर्थिक सिद्धांतों के संबंध में होती है।

दुर्भाग्य से हाल ही में, धार्मिक प्रतिष्ठानों और दमनकारी सरकारों द्वारा इज्तिहाद के प्रति प्रतिबंध लगाए जाने की घटनाएं हुईं हैं। हमें समझना चाहिए कि इज्तिहाद के अभ्यास के लिए व्यक्ति को स्वतंत्रता की अवधारणा रखनी चाहिए।

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