असम के बोंगाईगांव ज़िले के डॉ. रुबुल अहमद ज़रूरतमंदों की सेवा के लिए मसीहा बना रहे हैं। हर गुरुवार को वह धनतुला बाज़ार स्थित असम मेडिसिन सेंटर में मुफ़्त स्वास्थ्य कैंप आयोजित करते हैं, जिसमें हर हफ्ते 50 से 80 मरीजों का इलाज होता है। इस कोशिश में उन्हें ‘दृष्टि’ नामक संगठन का समर्थन मिला है।
डॉ. रुबुल अहमद ने आवाज़ द वॉयस को बताया कि उनके इलाके के लोगों के प्यार और आशीर्वाद ने उन्हें डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। “यहां के ज़्यादातर लोग महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। इसलिए मैंने मुफ़्त स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने का फैसला लिया।”डॉ. अहमद का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। बचपन में उन्होंने अपने पिता को खो दिया, और उनकी मां ने कठिन परिस्थितियों में उन्हें पढ़ाया। इसलिए वह गरीबों के संघर्षों को गहराई से समझते हैं।
2014 में गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने गुवाहाटी के नेमकेयर अस्पताल में बतौर इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर काम किया। इसके बाद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत धुबरी ज़िले के एक अस्पताल में अपनी सेवाएं दीं। जनवरी 2021 में, उन्होंने बोंगाईगांव सिविल अस्पताल में काम शुरू किया।
डॉ. अहमद का मानना है कि जीवन में सिर्फ पैसों के पीछे भागना ही सबकुछ नहीं है। “मैं अपने चिकित्सा ज्ञान का उपयोग गरीबों की मदद के लिए करता हूं। जब कोई मुझसे मुफ़्त चिकित्सा सेवा लेता है, तो वह फ़ीस बचाकर ज़रूरी दवाएं खरीद सकता है। अगर जिस मरीज़ के पास दवाई खरीदने के पैसे नहीं होते, तो मैं खुद उसकी दवाएं खरीदकर देता हूं।”
डॉ. रुबुल अहमद गरीबों की मदद करने के लिए अपना जीवन समर्पित करना चाहते हैं। उनके इस प्रयास से बोंगाईगांव जिले के धनतुला क्षेत्र के सैकड़ों लोगों को राहत मिली है।
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