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‘Desi Tesi’ गांव की परंपरा से ग्लोबल ब्रांड तक, Tilak Pandit ने ठेकुआ से रची स्टार्टअप की नई कहानी

कहते हैं आईडिया कहीं से भी आ सकता है। कोई ऐप बनाता है, कोई टेक कंपनी शुरू करता है, तो कोई गांव की परंपरा को बिज़नेस में बद देता है। बिहार के 23 साल के Tilak Pandit की कहानी भी कुछ ऐसी ही है उन्होंने साबित किया कि अगर सोच में दम हो, तो ठेकुआ जैसी पारंपरिक मिठाई भी लाखों के बाज़ार तक पहुंच सकती है।

वहीं ठेकुआ जो छठ पूजा में प्रसाद के रूप में बनता है, वही जो हर बिहारी के दिल और यादों में बसा हुआ है। तिलक ने इसी ठेकुआ को एक ब्रांड बना दिया ‘देसी तेसी’ (Desi Tesi) जो आज देशभर में लोगों को बिहार के स्वाद से जोड़ रहा है।

गुवाहाटी से शुरू हुई ‘Desi Tesi’ की कहानी

गुवाहाटी में असम और मेघालय की सीमा पर एक छोटा से मकान में रहते हैं Tilak Pandit अपने परिवार के साथ रहते हैं। आज यही छोटा सा घर “Desi Tesi” का किचन और वर्कस्पेस बन चुका है। लेकिन ये सफ़र इतना आसान नहीं था। जब तिलक गुवाहाटी में कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे, तब एक दिन कॉलेज फेस्ट में उन्होंने ठेकुआ का एक छोटा सा स्टॉल लगाया।

उन्होंने सोचा देखते हैं, लोगों को पसंद आता है या नहीं। लेकिन कुछ ही घंटों में सारे ठेकुवे बिक गए लोगों ने तारीफों के पुल बांध दिए, टीचर्स ने भी शाबाशी दी। और वहीं से तिलक के दिमाग में आइडिया आया “अगर ये ठेकुआ लोगों को इतना पसंद आ रहा है, तो क्यों न इसे बड़े लेवल पर बेचा जाए?”

YouTube बना सबसे बड़ा टीचर

Tilak के पास न कोई बिज़नेस अनुभव था, न पैसे। लेकिन उनके पास था जुनून, जज़्बा और सीखने की चाह। उन्होंने तय किया कि अगर ठेकुआ को देशभर तक पहुंचाना है, तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करना होगा। Tilak Pandit बताते हैं, “हमारे पास वेबसाइट बनाने का बजट नहीं था। तो हमने YouTube से सीखा कि Amazon पर प्रोडक्ट कैसे लिस्ट करते हैं। YouTube हमारा गुरु बन गया।”

उन्होंने सीखा कि FSSAI गाइडलाइन्स के हिसाब से लेबल कैसे डिज़ाइन करते हैं, पैकिंग में क्या-क्या ज़रूरी होता है, और Amazon पर सेलिंग प्रोसेस कैसे होती है। फिर उन्होंने खुद लेबल डिज़ाइन किया, Amazon अकाउंट बनाया और ठेकुआ को वहां लिस्ट कर दिया।

पहले ही दिन कुछ ऑर्डर मिल गए। लेकिन एक नई मुश्किल सामने आई उन्हें पता नहीं था कि पार्सल को शिप कैसे किया जाता है। ऑर्डर तो आ गए, लेकिन भेज नहीं पाए। कई ऑर्डर कैंसिल हो गए। लेकिन तिलक ने हार नहीं मानी। उन्होंने फिर से YouTube खोला और शिपिंग की प्रोसेस सीखा। धीरे-धीरे सब समझ में आने लगा। और यहीं से Desi Tesi ने अपनी असली उड़ान शुरू की।

सोशल मीडिया से मिली नई पहचान

Amazon पर बिक्री शुरू हो चुकी थी, लेकिन लोग अभी तक ‘Desi Tesi’ के बारे में जानते नहीं थे। तब तिलक ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने Instagram पर अपने काम की रील्स बनानी शुरू की कभी ठेकुआ तलते हुए, कभी पैकिंग करते हुए, तो कभी अपनी कहानी बताते हुए। उनकी सादगी और ईमानदारी लोगों को भा गई। धीरे-धीरे उनके वीडियो वायरल होने लगे।

आज उनके Instagram पर 50,000 से ज़्यादा फॉलोवर्स हैं। हर वीडियो पर लाखों व्यूज़ आते हैं। और अब उनके आधे से ज़्यादा ऑर्डर सीधे Instagram से ही आते हैं। Tilak Pandit बताते हैं कि, “पहले महीने में मेरी इनकम 2-3 हज़ार थी। अब हर महीने करीब 50 से 60 हज़ार की सेल होती है।

उसमें से 15-20 फीसदी मुनाफा रहता है।” ‘Desi Tesi’ के एक जार की कीमत ₹400 है। इसमें ₹60 लागत, ₹60 पैकिंग, ₹150 शिपिंग और ₹60 मार्केटिंग में जाता है। एक जार पर लगभग ₹70 का मुनाफा होता है। 2023 में जून से दिसंबर तक ‘Desi Tesi’ का औसत कारोबार ₹25,000 महीना था। 2024 में यह बढ़कर ₹30,000 हो गया। और 2025 के अगस्त तक ही Tilak करीब ₹5 लाख के ठेकुवे बेच चुके हैं।

परिवार बना ताकत

‘Desi Tesi’ सिर्फ़ एक बिज़नेस नहीं, बल्कि एक परिवार की मेहनत की कहानी है। तिलक की मां और दो बहनें इस काम में उनका पूरा साथ देती हैं। मां आटा गूंधती हैं, बहने ठेकुआ बनाती और पैकिंग करती हैं। छठ पूजा के समय तो पूरा घर एक “मिनी फैक्ट्री” में बदल जाता है। ऑर्डर इतने बढ़ जाते हैं कि बहनों को कॉलेज से छुट्टी लेकर मदद करनी पड़ती है।

मां मुस्कुराते हुए कहती हैं कि, “पहले तो घर का काम ख़त्म करके दिन भर खाली रहते थे। अब बिज़नेस में मन भी लगता है और खुशी भी मिलती है।” बहनें कहती हैं “जब ज़्यादा ऑर्डर आता है तो हम कॉलेज नहीं जाते, क्योंकि बहुत पैकिंग करनी होती है। लेकिन हमें गर्व है कि हमारा काम अब पूरे देश में जा रहा है।” Tilak Pandit की बहनों को भरोसा है कि एक दिन ‘देसी तेसी’ बहुत बड़ी कंपनी बनेगी।

Tilak Pandit का संघर्ष और सफलता

Tilak Pandit की कहानी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि सपनों को पूरा करने के लिए बड़े साधन नहीं, बल्कि बड़ी सोच चाहिए। उन्होंने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने उत्पाद को डिजिटल दुनिया में पहचान दिलाई। गांव की परंपरा को आधुनिक बिज़नेस मॉडल से जोड़ना आसान नहीं था। लेकिन Tilak ने इसे मुमकिन कर दिखाया।

उनके पिता कन्हैया पंडित गर्व से कहते हैं कि, ‘बेटा आगे बढ़ रहा है, इससे बड़ी खुशी और क्या होगी। हम हमेशा उसका साथ देंगे और उसे और आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे।’ आज Desi Tesi सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि एक संदेश है कि छोटे शहरों में भी बड़े सपने पलते हैं, और मेहनत से हर सपना सच हो सकता है।

ठेकुआ का स्वाद, सफलता की मिठास

एक छोटे से घर से शुरू हुआ ये सफ़र आज देशभर में लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है Tilak के ठेकुए न सिर्फ़ बिहार की पहचान बन चुके हैं, बल्कि अब ये देश के हर कोने में लोगों के दिल और स्वाद का हिस्सा बन रहे हैं। छठ पूजा के समय Tilak Pandit का घर सबसे ज़्यादा रौनक से भर जाता है। ऑर्डर इतने आते हैं कि काम चौबीसों घंटे चलता रहता है। लोग अब “Desi Tesi” के ठेकुआ को अपने घर के त्योहारों का हिस्सा बना चुके हैं।

तो अगली बार जब आप छठ पूजा में ठेकुआ खाएं, तो याद रखिए ये वही मिठाई है जिसने एक बेटे के सपने को उड़ान दी, एक मां के चेहरे पर मुस्कान लाई, और साबित किया कि “स्टार्टअप का स्वाद भी देसी हो सकता है।” मेहनत कीजिए, सपने देखिए और ठेकुआ खाते रहिए।

ये भी पढ़ें: असम का अनमोल खज़ाना: अगरवुड (Agarwood) और ज़हीरुल इस्लाम की मेहनत

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