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Mir Arshid Hussain: IT छोड़ थामा पुश्तैनी हुनर, अब Paper Mache को बनाना है ग्लोबल पहचान

Paper Mache कश्मीर की सदियों पुरानी रंगबिरंगी और नक़्क़ाशीदार कारीगरी है। जिसमें वेस्ट पेपर और नेचुरल गोंद से तैयार किया जाता है। और शानदार फूलदान, बॉक्स, प्लेट को इस्लामिक मोटिव्स और पशमीना डिज़ाइन से बनाया जाता है। यह कला सिर्फ़ रंग और डिज़ाइन नहीं है, बल्कि एक तहज़ीब है, एक परंपरा है, जिसे पीढ़ियों ने दिल से सींचा है।
श्रीनगर के Mir Arshid Hussain एक आईटी इंजीनियर है, लेकिन दिल से एक सच्चे पेपर मेशे कलाकार। इस कला को न केवल ज़िंदा रखे हुए हैं, बल्कि इसे दुनिया के मंच पर चमका भी रहे हैं।

पुश्तैनी हुनर, मॉडर्न सोच

Mir Arshid Hussain ने DNN24 को बताया कि पहले Paper Mache का कांसेप्ट अलग था। आज के दौर में Paper Mache का कांसेप्ट काफी अलग है। पहले ये सिर्फ़ व्यवसाय के लिए नहीं था इसको एक प्रोफेशन और एक साइंस के तौर पर देखा जाता था। बुज़ुर्गों ने इसे जितना भी सीखा है एक लगन और मेहनत के साथ सीखा है। Mir Arshid Hussain का पेपर मेशे से रिश्ता बचपन से है।

उनके पिता खुद एक कारीगर थे। स्कूल के बाद और कॉलेज की पढ़ाई के बीच उन्होंने पेपर मेशे की बारीकियां सीखी। नक्काशी, गोल्डन डेकोरेशन,और डिज़ाइनिंग की वो परंपरा जो कश्मीर की पहचान है। “आईटी में रहने के बाद मुझे पैसा तो मिल सकता था पैसे के अलावा मैं कुछ हासिल नहीं कर पाता। अरशद कहते हैं। “पेपर मेशे में मेरी पहचान थी, एक मक़सद था।” इसलिए उन्होंने तकनीक की दुनिया को अलविदा कहकर इस कला को बचाने का बीड़ा उठाया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर की गूंज

Mir Arshid Hussain ने ईरान में हुए 9th International Fajr Festival of Handicrafts में पहला स्थान हासिल कर पूरी दुनिया में कश्मीरी Paper Mache की पहचान को एक नया मुक़ाम दिया। यह सिर्फ़ एक जीत नहीं थी, बल्कि कश्मीर की हस्तकला की उस रूह की जीत थी जो आज भी ज़िंदा है। “7000 आर्टिज़ंस में से चुना जाना मेरे लिए गर्व की बात है। शायद इससे कोई और युवा प्रेरित हो, इस कला को अपनाए,और ये सिलसिला आगे बढ़े।”

परंपरा और इनोवेशन का संतुलन

मीर अरशिद ने Paper Mache में ट्रेडिशनल वर्क का सेंट्रल एशियन वर्क के साथ फ्यूजन किया है। उन्होंने ईरानी लोगों का चित्र बनाया। लेकिन कश्मीर के डिज़ाइन को भी साथ लेकर चले। अरशिद हुसैन का मानना है कि कला में इनोवेशन ज़रूरी है, लेकिन हद से ज़्यादा बदलाव उसकी आत्मा को मार देता है। उन्होंने Paper Mache में सेंट्रल एशियन डिज़ाइन और ईरानी एलिमेंट्स का फ्यूजन किया, लेकिन कश्मीरी ट्रेडिशन को कभी पीछे नहीं छोड़ा। “कश्मीर की हर कला चाहे वो वुड कार्विंग हो या कालीन — एक स्टैंडर्ड रखती है। अगर उसमें जड़ें मिटा दी जाएं, तो पहचान खो जाएगी।”

अरशिद कहते हैं कि पेपर मेशे आर्ट ईरान से आया है लेकिन ईरान की डिजाइनिंग अलग है। कश्मीर की अपनी अलग है। बेसिक डिजाइनिंग को कश्मीर में खुद डेवलप किया गया है। इसलिए कश्मीर में इसे बचाना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है। मीर अरशिद हुसैन ने अपनी बेहतरीन फनकारी से यह साबित कर दिया कि कश्मीरी हैंडीक्राफ्ट्स की डिमांड सिर्फ लोकल नहीं बल्कि ग्लोबल भी है। यह कारीगरी आज की मॉडर्न दुनिया में भी अपनी एक ख़ास जगह रखती है।

आने वाले कल की उम्मीद

अगर सरकार भी इसे बढ़ावा दे तो इस कला को बचाया जा सकता है। तब ये अगली पीढ़ी में जा सकता है। इस कला को अलग-अलग ज्योग्राफिकल एरियाज में लेकर जाया जाए तो इसे बचाने में मदद हो सकती है। Mir Arshid Hussain कहते हैं कि अगर कोई इस फील्ड में जाना चाहता है तो वो अच्छी तरह इसे सीखें। कश्मीरी Paper Mache को अक्सर बीते हुए वक़्त की कला माना जाता है, लेकिन मीर अरशिद हुसैन ने साबित कर दिया कि अगर दिल में जज़्बा हो, तो यह कला आज की दुनिया में भी चमक सकती है। वे पिछले 30 सालों से इस कला के साथ जुड़े हैं और चाहते हैं कि यह सफ़र अगली पीढ़ियों तक पहुंचे।

ये भी पढ़ें: नेशनल अवॉर्ड विजेता रियाज़ अहमद ख़ान की पेपर मेशी कला क्यों है ख़ास 

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