Wednesday, February 25, 2026
29.7 C
Delhi

मोर के पंख पर भील पेंटिंग उकेरने वाले जोधपुर के पहले चित्रकार मांगीलाल

भारत एक ऐसा देश है जहां हर कोने में आपको लोककला के रंग में सराबोर नायाब कलाकार देखने को मिल जाएंगे। उनके हाथों में ऐसा हुनर होता है जो देखने वालों को मोह लेता है। इन्हीं कलाकारों में से एक है भील जनजाति के शानदार कलाकार जोधपुर के मांगीलाल भील। जिनकी चित्रकला कुछ ख़ास है। वो राजस्थान के पहले ऐसे कलाकार है जो मोर के पंखों पर अपना हुनर उकेरते है।

भील पेंटिंग को कपड़ो, कैनवास और मोर के पंख पर बना रहे मांगीलाल

मांगीलाल को इस कला से जुड़े करीब 20 से 22 साल हो गए हैं। वो भील जनजाति की लोककला और संस्कृति को मोर के पंखों पर बड़ी ही ख़ूबसूरती के साथ सजाते रहे हैं। मांगी लाल ने DNN24 को बताया कि “भील जनजाति का प्रमुख नृत्य गवरी होता है। गवरी नृत्य रक्षाबंधन के बाद शुरू होता है और नवरात्री तक चलता है। पहले गवरी डांस के चित्र मांगी लाल के बुजुर्ग दीवारों पर बनाया करते थे।” आज वो भील पेंटिंग को कपड़े, कैनवास और मोर के पंख पर बना रहे हैं। वो 2015 से चित्र कपड़े और कैनवास पर बनाया करते थे। लेकिन साल 2021 से उन्होंने मोर के पंख पर पेंटिंग बनानी शुरू की।

कैसे आया मोर के पंख पर पेंटिंग बनाने का आईडिया

मांगीलाल ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान जब सभी लोग अपने घरों में बंद थे। उस दौरान वो कैनवास नहीं खरीद सकते थे। लेकिन घर के पास कई मोर आते थे, जिनके पंख टूटकर नीचे गिर जाते थे। एक दिन उन्होंने एक पंख उठाया और सोचा कि क्या इस पर भी कुछ कलाकृति बनाई जाए। फिर उन्होंने पंख पर छोटे -छोटे फूल और पत्तियां बनाईं। जो देखने में काफी ख़ूबसूरत लग रही थीं।

इन्ही पेंटिंग को उन्होंने ओड़िशा एग्जीबिशन में लगाई। जहां लोगों ने इसे काफी पसंद किया। इसके बाद उनकी एग्जीबिशन आदि महोत्सव में लगी तब भी उनकी पेंटिंग काफी बिकी और धीरे-धीरे अलग अलग डिज़ाइन बनाना शुरू किया।

अलग-अलग विषय पर आधारित होती है भील पेंटिंग

मांगीलाल भील पेटिंग आदिवासी नृत्य, शादी और रस्मों के आधार पर बनाते है। इसके अलावा देवी देवताओं जैसे गणेश जी, शिव जी, कृष्णा और जंगल के जानवरों को भी चित्रित करते हैं। 15 नवंबर 2023 में उन्हें राजस्थान के राज्यपाल ने इस कला को अलग-अलग जगहों पर पहुंचाने के लिए सम्मानित किया था। आज ये पेंटिंग उनकी रोज़ी रोटी का ज़रिया है। सरकार की ओर से आयोजित की जा रहे एग्जीबीशन से उन्हें काफी सम्मान और लाभ हो रहा है। वो चाहते हैं कि सिर्फ भारत ही नहीं विदेश में भी लोग इस कला को जानें।

ये भी पढ़ें: पानी बचाने की मुहिम से बने राम बाबू तिवारी “वाटर हीरो”

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

India’s Last Urdu Handwritten Newspaper Defies Digital Era

Every evening in Chennai, three calligraphers sit in an...

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib – A Center of Faith, Hope, and Spiritual Peace 

Best of Sadda Punjab “Tegh Bahadur simariye ghar nau nidh...

An Educator Establishes Largest High-Tech Private Library in South Kashmir

Shahid Shafi Itoo envisioned an affordable private library with...

Keep Your Living Space Cool with indoor plants

When temperatures in Delhi touched 46°C last May and...

Khan Market: Refugee Camp to Global Landmark

Khan Market, Delhi, stands today as one of the...

Topics

India’s Last Urdu Handwritten Newspaper Defies Digital Era

Every evening in Chennai, three calligraphers sit in an...

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib – A Center of Faith, Hope, and Spiritual Peace 

Best of Sadda Punjab “Tegh Bahadur simariye ghar nau nidh...

An Educator Establishes Largest High-Tech Private Library in South Kashmir

Shahid Shafi Itoo envisioned an affordable private library with...

Keep Your Living Space Cool with indoor plants

When temperatures in Delhi touched 46°C last May and...

Khan Market: Refugee Camp to Global Landmark

Khan Market, Delhi, stands today as one of the...

Assam Tribes Mastered Tea Centuries Before the British

The thick forests of eastern Assam hold a secret...

Manipuri Film Boong Wins Historic BAFTA Award

When Director Lakshmipriya Devi stepped up to accept the...

Your Reading Circle (YRC) Builds Reading Communities Beyond Silent Book Clubs

The Your Reading (YRC) Circle initiative is reshaping how...

Related Articles