संगीत की दुनिया में कुछ ऐसी आवाज़े होती हैं जो वक़्त के साथ और भी गहरी होती जाती हैं। ये आवाज़ें सिर्फ़ गाना नहीं गातीं बल्कि एक पीढ़ी का एहसास बन जाती हैं। Zubeen Garg, जिन्हें सारी दुनिया ‘Zubeen Da’ के नाम से जानती है, ऐसी ही एक आवाज़ थे। एक ऐसे सिंगर जो असम के दिल में धड़कते थे। और आज भी वो लोगों की धड़कनों में महसूस होते हैं।
उनके इस दुनिया को अलविदा कहे दो महीने से ज़्यादा वक़्त बीत चुका है, लेकिन असम आज भी किसी गहरे शोक में डूबा हुआ लगता है। ऐसा शोक जो किसी कलाकार के लिए नहीं बल्कि किसी अपने के लिए महसूस किया जाता है। कभी-कभी लगता है क्या आवाज़ें मर सकती हैं? लेकिन असम के सोनापुर पहुंचकर यकीन हो जाता है कि आवाज़ें कभी नहीं मरतीं।
सोनापुर: एक समाधि स्थल नहीं, एक तीर्थ स्थल
गुवाहाटी से लगभग 15 किलोमीटर दूर, सोनापुर का एक शांत इलाका अब असम का सबसे भावनात्मक और पवित्र जगह बन चुकी है। जहां बनी हैं Zubeen Garg की समाधि। यहां कोई शांति ढूंढ़ने आता है, कोई अपनी पीड़ा सुनाने, कोई धन्यवाद कहने, और कोई बस उनके करीब महसूस होने के लिए। दिन ढलता है, मौसम बदलते हैं लेकिन यहां आने वाली लोगों की भीड़ कभी नहीं बदलती। रोज़, बिना रुके, हज़ारों लोग सोनापुर पहुंचते हैं।

किसी के हाथ में फूल होते हैं, किसी के हाथ में लाल-सफ़ेद असमिया गमछा, और कई लोग खाली हाथ आते हैं सिर्फ़ दिल लेकर। वो खामोश खड़े रहते हैं। कुछ देर मिट्टी को देखते हैं। फिर तस्वीरों के सामने अपनी आंखें बंद कर लेते हैं। जो आंसू गिरते हैं वो सब कुछ कह देते हैं।
लोगों के दिलों में Zubeen Da, जैसे कोई अपना चला गया हो
असम में ये शोक सिर्फ़ एक स्टार की इस दुनिया से चले जाना भर नहीं है। ये उस इंसान का दर्द है, जो हर दिल में बसता था। समाधि स्थल पर लगे कटआउट, पोस्टर, दीवारों पर लिखी लाइनें हर कोना उनकी यादों से भरा है। हर जगह लिखा दिखाई देता है “Justice for Zubeen” और उनके गानों की लाइनों में छिपा दर्द अब शहर की हवा का हिस्सा बन चुका है।
एक बड़े पोस्टर पर लिखा है “मैं पानी की तरह हूं… मैं बहता रहूंगा। लेकिन वो धरती है, वो मुझे सिर्फ़ सोख सकती है।” ये पंक्ति अब असम की रूह पर लिखी हुई लगती है। लोग तस्वीर छूते हैं, माथा टेकते हैं, और चुपचाप खड़े रहते हैं जैसे अभी भी उम्मीद रखते हों कि शायद कोई सुर हवा में उतर आए।
जीते जी लोगों की सेवा और अब भी लोगों की रोज़ी
Zubeen Garg की इंसानियत असम के हर गांव, हर गली तक पहुंचती थी। उनके जाने के बाद भी, उनकी वजह से कई लोगों की रोज़ी-रोटी चल रही है। समाधि स्थल के पास फूल, गमछा, अगरबत्ती, चाय-बिस्कुट की छोटी दुकानें लगने लगी हैं। इन दुकानों से बहुत से परिवारों की ज़िंदगी चल रही है। रुपाली डेका जो सोनापुर की ही रहने वाली हैं, बताती हैं कि, ‘Zubeen Garg की बात करने और गाने सुनने से ही रोना आ जाता है।
हमारे घर में बगीचा है। वहीं के फूल हम समाधि पर चढ़ाने के लिए बेचते हैं। रोज़ हज़ार रुपए के फूल बिक जाते हैं। मैं रोज़ उन्हें प्रणाम करने आती हूं और फूल चढ़ाती हूं। वो जब ज़िंदा थे तब भी हमारी मदद करते थे… और आज भी कर रहे हैं। उनका कोई धर्म नहीं था। वो अच्छे इंसान थे गरीबों के लिए हमेशा खड़े रहने वाले।’ ये कहानी सिर्फ़ रुपाली की नहीं। असम के कई घरों में, लोग आज भी रोज़ उनकी वजह से ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। और यही उनकी महानता थी दिल बड़ा, आवाज़ और भी बड़ी।

लोगों की गवाही दर्द, यादें और सम्मान की आवाजें
समाधि स्थल पर कई लोग प्रार्थना करते हैं। कुछ अपनी हथेलियों को जोड़कर रो पड़ते हैं। कोई बस मिट्टी को हाथ में भरकर सिर पर लगा लेता है। एक ऐसा दृश्य जो ये बता देता है कि असम ने एक कलाकार नहीं एक परिवार का सदस्य खोया है। मिंटू कुमार कहते हैं ‘मैं क्या कहूं बहुत दर्द हुआ है। उनके जाने का दर्द हम लोग ही समझ सकते हैं। Zubeen Garg असम के दिल में हैं हमेशा।’
डॉ. अब्दुल क़ादिर कहते हैं कि, ‘वो एक अच्छे इंसान थे। वो सबके दिल में हैं। Zubeen Garg इंसानियत की मिसाल हैं।’ ये लाइन पूरे असम की भावनाओं का सार है। मोहसिन बताते हैं ‘Zubeen Garg वो थे जो आम आदमी की आवाज़ को दुनिया तक पहुंचाते थे। जब उनके जाने की ख़बर आई ऐसा लगा जैसे हमारा अपना चला गया। उनका जाना पर्सनल लॉस है।’
Zubeen Garg असम की एक धड़कन, एक विश्वास
गुज़रते वक़्त के साथ, लोग कई चीजें भूल जाते हैं। लेकिन कुछ आवाज़ें इतिहास नहीं, भावनाएं बन जाती हैं। Zubeen Garg अब एक कलाकार नहीं रहे, वो भावनाओं के बहाव में बहते अनंत सुर बन गए हैं। असम कहता है “हमने एक गायक नहीं खोया। हमने अपने घर का बच्चा खोया है। एक दोस्त, एक भाई अपनी मिट्टी की धड़कन खो दी है।”उनकी कला, उनके सुर, उनकी मुस्कान, उनकी इंसानियत सब कुछ आज भी असम की हवा में तैरता है।

रोज़ आने वाली भीड़ सिर्फ़ श्रद्धांजलि देने नहीं आती बल्कि इस जगह पर उन्हें शांति मिलती है। जैसे कोई अदृश्य सुर उन्हें छू जाता हो जैसे Zubeen Garg अभी भी यही हों, बस थोड़ा आगे किसी धुन में खोए हुए। ये एक समाधि नहीं, बल्कि असम का दिल है। कलाकार का शरीर मिट जाता है लेकिन उसकी कला अमर रहती है। Zubeen Garg चले गए, लेकिन उनके सुर, उनकी इंसानियत, उनकी मोहब्बत, उनकी मुस्कान अब भी असम की हवाओं में गूंजती है। ब्रहमपुत्र के किनारों पर बहती है। और हर दिल की धड़कन में धुन बनकर बसती है।
ये भी पढ़ें: असम का अनमोल खज़ाना: अगरवुड (Agarwood) और ज़हीरुल इस्लाम की मेहनत
आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।


