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छोटी उम्र में मां, अधूरी पढ़ाई और दर्द को ताक़त बनाकर समाज में बदलाव ला रहीं Sonu Kanwar

राजस्थान के अजमेर ज़िले की रहने वाली Sonu Kanwar की कहानी कोई आम कहानी की तरह नहीं है। बचपन में जब बाकी लड़कियां स्कूल, खेल में बिज़ी रहती हैं, उसी उम्र में सोनू की सिर्फ़ 12 साल की उम्र में शादी कर दी गई। खेलकूद, किताबें और मासूमियत सब कुछ वक्त से पहले ख़त्म कर दिया गया। Sonu बताती हैं कि शादी के मायने भी उनको उस नन्ही सी उम्र में नहीं पता थे। बस परिवार के दबाव और परंपरा के नाम पर उनकी ज़िंदगी बदल गई। 17 साल की छोटी-सी उम्र में वो तीन बेटियों की मां बन चुकी थीं।

गरीबी और अधूरी पढ़ाई का दर्द

Sonu की मां ने चारों बेटियों को पढ़ाया, लेकिन गरीबी और हालातों की मजबूरी में उनकी शादी कम उम्र में कर दी गई। ससुराल में भी सहारा नहीं मिला। तीन-तीन बच्चों को संभालना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। कई रातें वो रो-रोकर गुज़ारतीं और सोचतीं, “मेरी ज़िंदगी तो खत्म हो गई… काश, मैं भी अपनी पढ़ाई पूरी कर पाती।” लेकिन यही दर्द धीरे-धीरे उनकी सबसे बड़ी ताक़त बना।

अपने दर्द से बदली दूसरों की ज़िंदगी

Sonu Kanwar ने अपने टूटे ख़्वाबों को हमेशा के लिए दफ़न नहीं किया। उन्होंने सोचा, “अगर मैं अपने सपने पूरे नहीं कर पाई, तो कम से कम और बच्चियों का बचपन बचा सकूं।” यही सोच उन्हें उस मुक़ाम तक ले आई, जहां आज वो समाज में बदलाव की मिसाल बन चुकी हैं।

Sonu बताती हैं, “मेरा सपना था कि मैं पुलिस ऑफिसर बनूं और समाज की सेवा करूं। लेकिन जल्दी शादी हो गई, बच्चे हो गए और ज़िम्मेदारियों का बोझ इतना था कि मेरा सपना पूरा ही नहीं हो पाया। उस वक़्त मुझे एहसास हुआ कि ये सही नहीं था। तभी मैंने ठान लिया कि जो मेरे साथ हुआ, वो किसी और बच्ची के साथ न हो।”

अकेले शुरू किया सफ़र, झेले ताने और विरोध

बाल विवाह (Child Marriage) के खिलाफ़ आवाज़ उठाना आसान नहीं था। शुरुआत में लोग Sonu Kanwar से कहते थे, “तुम्हें क्या फायदा? क्यों किसी का घर तोड़ रही हो?” लेकिन Sonu ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने लगातार गांव-गांव जाकर समझाया कि बाल विवाह (Child Marriage) अपराध है और ये बच्चों का भविष्य छीन लेता है।

धीरे-धीरे लोग उन्हें समझने लगे। कई बार परिवारों ने उनका विरोध किया, मानसिक प्रताड़ना भी दी, लेकिन Sonu Kanwar का जज़्बा कभी कम नहीं हुआ। Sonu बताती हैं कि उस समय बहुत डर लगता था। कई बार उन्हें अकेले ही शादी के मंडप में जाकर परिवार से कहना पड़ता कि “ये गलत है, ये अपराध है।” लेकिन वो डरी नहीं। धीरे-धीरे गांव के कुछ लोग उनका साथ देने लगे।

Sonu कुछ वक़्त बाद राजस्थान महिला कल्याण मंडल नामक संगठन से जुड़ी। संगठन के सहयोग से Sonu ने न सिर्फ़ दर्जनों बाल विवाह रोके। अब लोग उन्हें सिर्फ एक महिला नहीं, बल्कि बदलाव की आवाज़ मानते हैं।

लोगों को मारवाड़ी और हिन्दी भाषा में समझाना

Sonu Kanwar को पता है कि बदलाव तब तक नहीं आएगा, जब तक लोग दिल से समझें। इसलिए वो लोगों से स्थानीय भाषा मारवाड़ी में बात करती हैं। जब ज़रूरत हो तो हिन्दी का सहारा लेती हैं। वो माता-पिता को समझाती हैं कि बच्चों की जल्दी शादी कर देने से वो पढ़-लिख नहीं पाते और ज़िंदगी भर गरीबी और मजबूरी में जीते हैं।

पहले-पहल Sonu खुद गांव-गांव जाकर जानकारी इकट्ठा करती थी, कौन-से घर में शादी तय हो रही है, दूल्हा-दुल्हन की उम्र क्या है। लेकिन अब तो लोग खुद उन्हें जानकारी देने लगे हैं। अक्सर लोग फ़ोन करके बताते हैं कि “इस जगह बाल विवाह (Child Marriage) हो रहा है।” Sonu Kanwar तुरंत प्रशासन को ख़बर देती हैं और मौक़े पर पहुंचकर शादी रुकवाती हैं।

Sonu Kanwar के मुताबिक बाल विवाह की वजहें

भारत में चाइल्ड मैरिज प्रोटेक्शन एक्ट 2006 लागू है, लेकिन इसके बावजूद कई राज्यों में आज भी बाल विवाह (Child Marriage) हो रहे हैं। इसके पीछे की वजह Sonu बताती हैं कि इसकी सबसे बड़ी वजह है-कानून की जानकारी का अभाव। दूसरी बड़ी समस्या है अशिक्षा। जो लोग पढ़े-लिखे नहीं होते, वो सही और ग़लत में अंतर नहीं कर पाते। इसके अलावा, पुरानी परंपराओं को ढोने की सोच भी बाल विवाह (Child Marriage) को बढ़ावा देती है, लोग मानते हैं कि “ये तो पहले से होता आया है, इसलिए इसे जारी रखना चाहिए।”

बाल विवाह से आगे- शिक्षा, पर्यावरण और समाज सेवा

Sonu Kanwar का काम सिर्फ़ बाल विवाह (Child Marriage) रोकने तक सीमित नहीं है। वो समाज के कई मुद्दों पर काम कर रही हैं जैसे ड्रॉपआउट लड़कियों को फिर से पढ़ाई से जोड़ना, ज़रूरतमंदों को पेंशन और व्हीलचेयर दिलवाना, पौधे लगाना और लोगों को हरियाली के महत्व के बारे में समझाना, खुद पर्दा हटाकर औरतों को हिम्मत देना। इसके अलावा Sonu ‘नशा मुक्ति अभियान’ भी चलाना चाहती हैं।

शिक्षा जारी रखने का हौसला

हालात चाहे जैसे हों, Sonu Kanwar ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। 12वीं पास करने के बाद अब 12 साल के गैप के बाद वो ग्रेजुएशन कर रही हैं। वो मानती हैं कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती। अगर औरतें पढ़ेंगी, तो वो खुद अपने फैसले लेंगी। शादी कब करनी है, कैसे करनी है यह भी वे खुद तय करेंगी। Sonu अब चाहती हैं कि उनका काम और बड़ा हो।

Sonu Kanwar मानती हैं किबाल विवाह (Child Marriage) रोकना सिर्फ़ एक व्यक्ति या संगठन की ज़िम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए सरकार और प्रशासन को भी सख़्ती करनी चाहिए। Sonu Kanwar की कहानी साबित करती है कि इंसान चाहे कितना भी टूटा हो, अगर हिम्मत रखे तो समाज बदल सकता है। उन्होंने अपने अधूरे सपनों को ताक़त बनाया और आज हज़ारों बच्चियों की ज़िंदगी बदल रही हैं।

ये भी पढ़ें: 14 की उम्र में समाज ने ठुकराया: Sumi Das के MoitriSanjog Gurukul में बच्चों को मिलती है मुफ़्त शिक्षा

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