Monday, March 9, 2026
34.9 C
Delhi

कला(Art) के रंग, समय के संग: भारत की विलुप्त होती धरोहर

भारत में कला(Art) और संस्कृति की धरोहर है। यहां की हर गली, हर गांव अपनी अनूठी कला(Art) को समेटे हुए है। लेकिन जैसे-जैसे समय बदला, मशीनों ने हाथों की जगह ले ली, और कई प्राचीन कलाएं धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई। हालांकि, कुछ आर्टिस्ट इन्हे कलाओं को जीवित रखने की कोशिश कर रहे हैं। आइए, उन भूली-बिसरी कलाओं की बात करें, जिनकी सुंदरता और महत्व को हमें दोबारा संजोने की ज़रूरत है।

रोगन आर्ट(Rogan Art): हाथों की जादूगरी

रोगन आर्ट(Rogan Art), जो मूल रूप से फ़ारस से आई थी, गुजरात के कच्छ में अपनी पहचान बना चुकी है। यह बल्कि सदियों पुरानी विरासत है। जिसमें आर्टिस्ट अपने हाथों की कुशलता से कपड़े पर जीवंत चित्र उकेरते हैं—बिना ब्रश या स्टैंप के, बिना कपड़े को छुए।

रोगन आर्ट(Rogan Art)

इसमें अरंडी का तेल यानि कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल होता है। अरंडी के बीजों से निकले तेल को उबालकर एक गाढ़े पेस्ट में बदला जाता है, जिसे दो दिनों तक मिट्टी की हांडी में पकाया जाता है। जब यह तैयार हो जाता है, तो इसमें अलग-अलग प्राकृतिक रंग मिलाए जाते हैं और तब जाकर रोगन आर्ट के लिए रंग बनते हैं। इन रंगों को एक सधे हुए हाथ की नोक से कपड़े पर उतारा जाता है, जहां एक हाथ डिज़ाइन बनाता है और दूसरा उसे संतुलित करता है।

पहले यह राजसी पोशाकों और महलों की दीवारों की शोभा बढ़ाती थी, लेकिन बदलते समय के साथ इसकी चमक फीकी पड़ गई। निरोणा गाँव के खतरी परिवार ने इसे जीवित रखने का बीड़ा उठाया है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को रोगन पेंटिंग उपहार में देकर इसे वैश्विक पहचान दिलाई।

लिप्पन आर्ट(Lippan Art) : मिट्टी और दर्पण का संगम

गुजरात के कच्छ में यह प्रचलित एक और प्राचीन कला(Art) है, जिसे मड मिरर वर्क भी कहा जाता है। मिट्टी और दर्पण का यह अनूठा मेल घरों की दीवारों को न केवल सुंदर बनाता है, बल्कि यह गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्माहट भी देता है। रबारी और मारवाड़ा समुदाय की महिलाएँ इसे को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा रही हैं।

इसको बनाने के लिए सबसे पहले दीवारों को मिट्टी और गोबर से प्लास्टर किया जाता है, जो घर को ठंडा रखने में मदद करता है। फिर, सफेद मिट्टी से जटिल डिज़ाइन उकेरे जाते हैं और छोटे-छोटे शीशे लगाए जाते हैं। दर्पणों की चमक से यह रात में झिलमिलाती हुई दिखती है, जिससे घर जीवंत हो उठता है। यह कभी ग्रामीण जीवन हिस्सा थी, लेकिन अब यह सजावट तक सीमित रह गई है।

चेरियाल स्क्रॉल पेंटिंग: कहानियों की चित्रमय दुनिया

चेरियाल स्क्रॉल पेंटिंग तेलंगाना की एक अनोखी और पारंपरिक कला है। इसे ख़ासतौर पर हैदराबाद में बनाया जाता है। यह पेंटिंग एक फिल्म रोल या कॉमिक स्ट्रिप जैसी दिखती है, जिसमें पौराणिक कहानियाँ और लोक कथाएँ चित्रों के ज़रिए बताई जाती हैं। पहले यह पेंटिंग चेरियाल गांव में बनाई जाती थी, इसलिए इसे चेरियाल स्क्रॉल पेंटिंग कहा जाता है।
इसका गहरा संबंध काकी पडगोल्लू नामक समुदाय से है, जो कहानियाँ सुनाने और गाने-बजाने का काम करता था। वे इन स्क्रॉल पेंटिंग को संगीत और नृत्य के साथ दिखाते थे। पहले ये स्क्रॉल बहुत लंबे होते थे, जिनकी लंबाई 40-45 फीट तक होती थी। अब आर्टिस्ट छोटे-छोटे चित्र बनाते हैं, जिन्हें दीवार पर टांगा जा सकता है।

इस पेंटिंग के लिए कैनवास तैयार करना एक खास प्रक्रिया होती है। इसे खादी कपड़े पर बनाया जाता है, जिसमें स्टार्च, सफेद मिट्टी, इमली के बीजों का पेस्ट और गोंद मिलाया जाता है। जब कैनवास तैयार हो जाता है, तो कलाकार ब्रश से सीधा चित्र बनाते हैं। इन चित्रों की रूपरेखा बहुत साफ और सटीक होती है।

सांझी आर्ट (Sanjhi Art): कागज़ पर उकेरती भक्ति

यह उत्तर प्रदेश के वृंदावन और मथुरा की एक पारंपरिक कला (Art)है, जो कागज़ को काटकर बनाई जाती है। यह भगवान कृष्ण की लीलाओं को दर्शाने के लिए बनाई जाती है। यह बहुत पुरानी परंपरा है, जिसे खासतौर पर मंदिरों में भगवान को अर्पित करने के लिए किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा और उनकी सखियां संध्या समय में भगवान कृष्ण के गौचारण से लौटने पर उनका स्वागत करने के लिए फूलों से सुंदर आकृतियां बनाती थी। ‘संध्या’ शब्द से ही ‘सांझी’ शब्द की उत्पत्ति मानी जाती है।

इसकी सबसे ख़ास विशेषता इसकी ज्यामितीय रूपरेखा है। आम तौर पर, एक अष्टकोण, वर्ग या पंचकोण की आकृति बनाई जाती है, जिसमें बेल-बूटे, फूल आदि की जटिल डिज़ाइन भरी जाती हैं। केंद्र में अक्सर राधा-कृष्ण की मूर्ति होती है। इन डिज़ाइनों को अंतिम रूप देने में कभी-कभी तीन से चार दिन लग सकते हैं। इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक मोटे कागज़ या धातु की चादर ली जाती है। इसमें बारीक डिज़ाइन काटे जाते हैं। इन डिज़ाइनों को दीवार, फर्श या पानी के ऊपर रखकर रंग भरे जाते हैं। कई बार फूलों की पंखुड़ियों, चावल या रंगीन पाउडर से इसे सजाया जाता है।

सांझी आर्ट (Sanjhi art)

आज यह लगभग विलुप्त हो रही थी, लेकिन कई आर्टिस्ट इसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं। मशहूर अभिनेत्री हेमा मालिनी और 1000 क्रिएटर्स प्रोजेक्ट इसको फिर से जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। अब इसे आधुनिक तरीकों से भी बनाया जा रहा है, ताकि यह आने वाली पीढ़ियों तक बनी रहे।

कलाओं को पुनर्जीवित करने की ज़रूरत

यह हमारी संस्कृति और इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। यदि इन्हें संरक्षित नहीं किया गया, तो ये केवल किताबों तक सिमटकर रह जाएंगी। हमें इन विलुप्त होती कलाओं के लिए जागरूकता फैलानी होगी और आर्टिस्ट को समर्थन देना होगा। सरकार, संस्थाएं और आम लोग मिलकर अगर इन आर्टिस्ट को उचित मंच दें, तो यह अनमोल धरोहर हमेशा जीवित रह सकती है। यह हमें अपनी जड़ों से जोड़ती हैं और हमारी पहचान को बनाए रखती हैं। इन्हें बचाना केवल आर्टिस्ट की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सबका कर्तव्य है। आइए, हम इन आर्ट्स को फिर से संजोएं और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।

ये भी पढ़ें: मधुबनी पेंटिंग: इतिहास, अहमियत और बनाने का तरीका

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

Qurratulain Hyder: An Unmatched Voice in Urdu Fiction

Qurratulain Hyder, who began crafting stories at age 11,...

Indian Female Streamers Transform Gaming Industry Landscape

New Delhi, April 11, 2024 Twenty-six-year Payal Dhare sat...

Kerala Teacher Lathika Suthan Builds ₹40,000 Monthly Business Growing Lotus Plants

In Thrissur, Kerala, former primary school teacher Lathika Suthan...

Chennai Couple Quit Banking Jobs for Forest Conservation

While most professionals in their early thirties focus on...

Fighting Cybercrime Across Borders

The FBI and Indian law enforcement work together to...

Topics

Qurratulain Hyder: An Unmatched Voice in Urdu Fiction

Qurratulain Hyder, who began crafting stories at age 11,...

Indian Female Streamers Transform Gaming Industry Landscape

New Delhi, April 11, 2024 Twenty-six-year Payal Dhare sat...

Kerala Teacher Lathika Suthan Builds ₹40,000 Monthly Business Growing Lotus Plants

In Thrissur, Kerala, former primary school teacher Lathika Suthan...

Chennai Couple Quit Banking Jobs for Forest Conservation

While most professionals in their early thirties focus on...

Fighting Cybercrime Across Borders

The FBI and Indian law enforcement work together to...

Urdu Poetry’s Holi Words Unite Cultural Traditions

When Mughal emperor Bahadur Shah Zafar threw coloured powder...

India-Canada ties set on the fast track

Nearly a month after his rousing speech about the...

Holi Songs Across All Hindustani Gharanas

When the spring festival of Holi arrives each year,...

Related Articles