21-Feb-2024
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1857 के ग़दर में अंग्रेज़ों की कोठियां जलाकर बना कंपनी बाग पार्क

इस वेस्टर्न पार्क में शहर के बराबर में होने की वजह से शहर पर नज़र रखने का काम आसान हो गया था।

मुरादाबाद पीतल नगरी के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर हैं आज बात पीतल नगरी के लिहाज़ से नहीं बल्कि, मुरादाबाद के बने कंपनी बाग पार्क की करेगें। इस पार्क का इतिहास बेहद दिलचस्प है। बताया जाता है कि, ये पार्क अंग्रेज़ों की कोठियों को जलाकर बनाया गया था। चलिए आपको कंपनी बाग पार्क का इतिहास के बारे में बताते हैं।

Moradabad Junction
Moradabad Junction (Railway Station)

1911 में Lord Lupton के नाम पर बना Lupton Club

Lupton Club, Civil Lines, Moradabad
Lupton Club, Civil Lines, Moradabad (Picture by DNN)

मुरादाबाद बहुत पुराना शहर है मुरादाबाद को 1864 में District Board बना दिया गया। इसके बाद से इसका development शुरू हुआ है। कंपनी बाग पार्क के नज़दीक एक Lupton club भी हैं इसके बारे में कहा जाता है कि, यहां Lord Lupton घूमने आए थे। उनके रूकने के लिए इस इमारत को 1911 में बनाया गया था। जो आज भी पुराने ज़माने की याद दिलाती है। उस ज़माने में शहर की आख़िरी सीमा Town Hall हुआ करती थी। कंपनी बाग पार्क में 1857 के गदर में अंग्रेज़ों की कोठियां हुआ करती थी। अंग्रेज़ों की कोठियां गदर के लोगों ने जला दी। जिनमें एक लीडर था पुरंगा अहीर। जो एक अंग्रेज़ को थप्पड़ मारने के जुर्म में जेल में कैद था। जब आज़ादी के दीवानों ने जेल तोड़ दी। तो यहां से पुरंगा अहीर भाग निकला और उसने तमाम इलाके़ में क्रांतिकारियों का नेतृत्व भी किया। कंपनी बाग पार्क सिविल लाइन इलाके की 1857 के दौर में जो कोठियां जलाई गयी.यहां से बहुत सारे अंग्रेज़ भागकर नैनीताल चले गये।

इस जगह का नाम कंपनी बाग पार्क कैसे पड़ा

इतिहासकारों के मुताबिक 1857 के गदर में अंग्रेज़ों की कोठियों को जला दिया गया। जिसके बाद यह जगह पार्क के रूप में developed हो गई। सर जेम्स मेस्टर्न ने 1906 से 1912 तक गवर्नर के तौर पर कार्यभार संभाला। उनके ही नाम पर इस जगह का नाम मेस्टन पार्क पड़ा था। फिर वक़्त के साथ-साथ इस जगह को कंपनी बाग पार्क के नाम से पुकारा जाने लगा।

कंपनी बाग पार्क में अंग्रेज़ सुबह-शाम टहलने आया करते थे। इसके साथ ही सरकारी अधिकारी भी यहां टहला करते थे। इस वेस्टर्न पार्क में शहर के बराबर में होने की वजह से शहर पर नज़र रखने का काम आसान हो गया था। दूसरी बात यह है जो इसकी LOCATION है बाहर से आने वालों का जो भी रास्ता है वो शहर के बाहर यहीं पर रूकेगा। 1857 के गदर में नवाब रामपुर मुरादाबाद आये थे। जो अंग्रेज़ों के पक्ष में खड़े थे। उन्होनें दमदमा कोठी में अपना पढ़ाव डाला था। अब इस पार्क को नगर निगम द्वारा और भी ज़्यादा तबदील किया जा रहा है।

अब कंपनी बाग पार्क PPP Model पर बनेगा

इतिहासकार डॉ. अजय अनुपम ने DNN24 से बात करते कहा कि हम ख़ास तौर से यह मानते है कि 1857 में गदर शांत होने के बाद अंग्रेज़ों की हिफ़ाज़त के लिए, टहलने के लिए और सुबह की हवा में सैर करने के लिए यह पार्क बनाया गया गया।

अब पार्क को पीपीपी मॉडल यानी Public Private Partnership पर बनाने की तैयारी चल रही हैा करीब सात एकड़ क्षेत्र में फैले इस पार्क में बच्चे से लेकर बड़ों तक के खेल, मनोरंजन, व्यायाम और कई चाज़ें की व्यवस्था होगी।

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