Wednesday, February 4, 2026
19.1 C
Delhi

अपने माता-पिता की याद में बनवाया मिनी ताजमहल

असम के गुवाहाटी का एक मज़ार मिनी ताजमहल (Mini Taj Mahal) के नाम से जाना जाता है। इस इमारत को एक बेटे ने अपने माता-पिता की याद में बनवाया। ये इमारत आज पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। 

हज़रत मुर्तजा अली शाह सफवी और सूफिया बेगम शाह सफवी (Hazrat Murtaza Ali Shah Safvi and Sufia Begum Shah Safvi) की याद में बनवाया है दूध सा सफेद और ताजमहल जैसी दिखनी वाली इमारत के अंदर ही हज़रत मुर्तजा अली शाह सफवी और सूफिया बेगम शाह सफवी की कब्रगाह है। हज़रत को उनके मुरीद गुरू और उनकी पत्नी को गुरू मां का दर्जा देते है। हज़रत अली के बेटे का मानना है कि ये मज़ार (मिनी ताजमहल) उन्होंने अपने पिता के लिए नहीं हजरत अली के सैकड़ों मूरीदों ने मिलकर अपने मुर्शिद के लिए बनवाया है। उनके बेटे मेहताब हुसैन कहते है कि हज़रत मुर्तजा अली शाह को हम अपने गुरू के रूप में मानते है और उनके जन्मदिन को हम मनाते है।

मिनी ताजमहल
Hazarat Murtaza Ali Dargah Sharif (Photo: DNN24)

मिनी ताजमहल की क्या है ख़ासियत 

मज़ार की इमारत में कुल तीन गुम्मत है बीच के बड़े गुम्मत के ऊपर चांद और तारा लगाया गया है। इस इमारत की ख़ासियत यह है कि चारों तरफ से एक सी नज़र आती है। मेन दरवाजे से अंदर घुसते ही बीच में हज़रत मुर्तजा अली शाह सफवी और उनकी बेगम की कब्रगाह है। हर गुम्मद के चारों ओर छोटी छोटी चार मीनारें है। बस फक्र इतना है कि शाहजहां का ताजमहल संगमरमर से बनाया गया और मुर्तजा अली शाह का ताजमहल ईट और सीमेंट से बनाया गया है। 

इस इमारत की देखभाल कर रहे महरूम अली DNN24 को बताते है कि इसे बनाने के लिए हज़रत के मुरीदों में से किसी ने सीमेंट दिया तो किसी ने बालू तो किसी ने कुछ इस तरह ये इमारत 2012 में बनना शुरू हुई और 2019 तक बन कर पूरी तरह तैयार हो गई। ताजमहल की तरह दिखने वाली इस इमारत का नाम लोगों ने मिनी ताजमहल रख दिया गया। 

कौन थे हज़रत मुर्तजा अली शाह सफवी

19 वीं शताब्दी की शुरूआत में असम के दारंग जिले के एक छोटे से गांव में हज़रत मुर्तजा अली शाह सफवी का जन्म हुआ था। उस वक्त गांव के लोग पढ़ाई से काफी दूर थे। लेकिन हज़रत मुर्तजा अली को पढ़ाई में दिलचस्पी थी इसलिए वो पढ़ाई के लिए शहर की ओर बढ़ गए। उसके बाद ढाका यूनिवर्सिटी से इंजीनियर की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वापस अपने गांव लौटे और असम में नौकरी करने लगे। यहां से उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया। यहां वो एक मुर्शिद के संपर्क में आए। और धीरे धीरे अध्यात्मिक ज्ञान की ओर बढ़ते चले गए। दुनिया से बेखबर हज़रत मुर्तजा अली धर्म की राह पर चलते रहे। उनके देहांत के बाद उनके मुरीदों ने असम के हाथीगांव में उनको दफन किया जहां आज ये मज़ार है।

 हर साल 26 नवंबर को मजार में धूमधाम से उनका ऊर्स मनाया जाता है। हज़ारों की संख्या में मुरीद वहां पहुंते है। इस साल भी 26 नवंबर को ऊर्स मनाया गया। इस अवसर पर उनकी लिखी गई कविताएं पढ़ी गई। मुरीदों ने मज़ार के बाहर मोमबत्ती जलाकर और मज़ार के अंदर चादर चढ़ाकर अपनी आस्था व्यक्त की। इनमे से कुछ लोग ऐसे भी थे जो मिनी ताजमहल देखने के लिए गुवाहटी आए थे।

मिनी ताजमहल
Mini Tajmahal in Guwahati, Assam (Photo: DNN24)

साल 1995 में हज़रत मुर्तजा अली का इंतकाल हो गया, इसके बाद साल 2010 में उनकी पत्नी का इंतकाल हो गया जिन्हे मुरीद गुरू मां का दर्जा देते है। 2016 में गुरू के छोटे बेटे शब्बीर हुसैन का इंतकाल हुआ उन्हें भी इसी परिसर में मज़ार से कुछ दूरी पर दफनाया गया है। भले ही लोगों ने इस मज़ार को मिनी ताजमहल का नाम दे दिया हो लेकिन ये धीरे धीरे एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। 

ये भी पढ़ें: ‘तहकीक-ए-हिंद’: उज़्बेकिस्तान में जन्मे अल-बीरूनी का हिंदुस्तान की सरज़मीं से ख़ास रिश्ता

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

Kaif Ahmed Siddiqui: Sitapur’s Poet Who Chases Words

In 1943, in the quiet lanes of Sitapur in...

Stories Behind the Making of Bollywood Legends

Untold Stories That Built Bollywood Legends begins not with...

From tariffs to trade: A reset of India-US ties

Close on the heels of the ‘mother of all...

J. P. Saeed: Aurangabad’s Forgotten Urdu Poetry Master

In 1932, in the old lanes of Aurangabad in...

Narcotics and the Geopolitics of a New Hybrid War

Cross-border terrorism in the Kashmir valley has morphed into...

Topics

Kaif Ahmed Siddiqui: Sitapur’s Poet Who Chases Words

In 1943, in the quiet lanes of Sitapur in...

Stories Behind the Making of Bollywood Legends

Untold Stories That Built Bollywood Legends begins not with...

From tariffs to trade: A reset of India-US ties

Close on the heels of the ‘mother of all...

J. P. Saeed: Aurangabad’s Forgotten Urdu Poetry Master

In 1932, in the old lanes of Aurangabad in...

Narcotics and the Geopolitics of a New Hybrid War

Cross-border terrorism in the Kashmir valley has morphed into...

Ibrahim Aajiz: A Quiet Star In A Small Village

In a small village called Sheikhpur, far from any...

Free Libraries Network: Children Walk Into a Room Full of Books and Possibility

Children step into a small room lined with shelves....

Koodugal Nest: Built 15,000 Tiny Homes to Bring Back the Sparrows We Lost

Sparrows were once the heartbeat of our bustling streets,...

Related Articles