Tuesday, March 10, 2026
24.3 C
Delhi

कथक: उत्तर प्रदेश की सरज़मीं से उठता एक रूहानी रक़्स (नृत्य)

उत्तर प्रदेश की ज़मीन सिर्फ़ इतिहास और सभ्यता की नहीं, बल्कि रूहानी फ़नकारी की भी गवाह रही है। यही सरज़मीं है जहां कथक जैसे भावपूर्ण और जीवंत नृत्य रूप ने जन्म लिया। एक ऐसा रक़्स जो कहानी कहता है, अहसास जगाता है और तहज़ीब को ज़िंदा रखता है।

 कहां से निकला कथक नृत्य?

“कथक” शब्द संस्कृत के शब्द “कथा” से निकला है, जिसका अर्थ है  कहानी। पुराने वक़्तों में जब टीवी, थिएटर या किताबें नहीं थीं, तब कहानी कहने वाले लोग मंदिरों में जाकर अपने नृत्य और अभिनय के ज़रिए देवी-देवताओं की लीलाएं सुनाते थे। इन्हें ‘कथक’ कहा जाता था। यानी वो लोग जो कथा कहें।

उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन और काशी जैसे पवित्र स्थलों पर, ये कथक कलाकार भगवान श्रीकृष्ण और राधा की लीलाओं को हाव-भाव और पदचिह्नों के ज़रिए ज़िंदा करते थे। उनकी थापें मंदिर की सीढ़ियों पर बजती थीं, और हर अदा में भक्ति की रवानी होती थी।

कथक कलाकार

मंदिरों से महलों तक: कथक का सफ़रनामा

वक़्त बदला और कथक का दायरा भी। जब मुग़ल भारत आए, तो उन्होंने इस फन को अपने शाही दरबारों में जगह दी। कथक अब सिर्फ धार्मिक प्रस्तुति नहीं रहा, बल्कि इसमें शृंगार, मोहब्बत, नज़ाकत और अदब का भी तड़का लग गया।

लखनऊ, काशी और जयपुर में नवाबों और राजाओं की सरपरस्ती में कथक को नई ज़िंदगी मिली। वहां तबले की गूंज, सारंगी की मिठास और घुंघरुओं की झंकार में कथक की शान और भी बढ़ गई। अब ये नृत्य सिर्फ़ पूजा नहीं, बल्कि फ़न का हिस्सा भी बन गया। 

समय के साथ कथक की रंगत 

समय के साथ-साथ कथक में कई बदलाव आए। ये बदलाव सिर्फ़ लिबास या मंच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि इसकी आत्मा में भी नए रंग भर गए:

  • कथावाचन की शैली में अब पौराणिक कहानियों के साथ आधुनिक विषय भी दिखाए जाते हैं।
     
  • परिधान भी बदल गए — पारंपरिक धोती और ओढ़नी की जगह अब रंगीन, डिज़ाइनर पोशाकें नज़र आती हैं।
     
  • संगीत में भी फ्यूज़न, जैज़, वेस्टर्न बीट्स का तड़का लगाया जाने लगा है।
     
  • थिएटर और फिल्मों में कथक का समावेश बढ़ा है, जिससे आम जनता से भी इसका रिश्ता गहरा हुआ है।

मुगल काल के दौरान कथक को एक नया रंग मिला। जब मुग़ल शासक उत्तर भारत आए, तो उन्होंने इस नृत्य को अपने दरबारों में जगह दी। अब इसमें सिर्फ़ धार्मिक कथाएं नहीं रहीं, बल्कि शृंगार रस (प्रेम, सौंदर्य और भावनाओं) का तड़का भी जुड़ गया। लखनऊ, काशी और जयपुर में इसे राजाओं और नवाबों की सरपरस्ती मिली। नृत्य अब महलों की ज़मीनों पर भी गूंजने लगा, जहां तबले की थाप और घुंघरुओं की झंकार में कथक ने एक नई ज़िंदगी पाई।

जिन्होंने कथक को निखारा और दुनिया के सामने पेश किया

 पंडित बिरजू महाराज (लखनऊ घराना)

कथक का ज़िक्र हो और बिरजू महाराज का नाम न आए, ऐसा मुमकिन नहीं। लखनऊ घराने के इस उस्ताद ने कथक को एक नई उड़ान दी। उनका नृत्य सिर्फ़ देखने की चीज़ नहीं था, वो तो महसूस किया जाता था। उन्होंने कई फ़िल्मों में कोरियोग्राफ़ी की और दुनियाभर में कथक को पहुंचाया। उन्हें पद्म विभूषण से नवाज़ा गया।

शंभु महाराज और अच्यान महाराज

ये भी लखनऊ घराने के बड़े नाम रहे। शंभु महाराज की भाव-भंगिमा और अच्यान महाराज का ताल ज्ञान, कथक की विरासत को समृद्ध बनाने में अहम रहे।

 सितारा देवी (काशी बनारस घराना)

‘कथक की रानी’ कही जाने वाली सितारा देवी ने इस नृत्य को एक ऐसी ऊर्जा दी जो आमतौर पर पुरुषों से जुड़ी मानी जाती थी। वो मंच पर आग की तरह जलती थीं और विदेशों तक कथक की मशाल लेकर गईं।

 राजेंद्र गंगानी (जयपुर घराना)

जयपुर घराने के मज़बूत पांवों वाले, गति और लय के उस्ताद। इनकी परफ़ॉर्मेंस में तकनीक और ताल का शानदार मेल देखने को मिलता है।

कथक की सेवा करने वाले कई कलाकारों को समय-समय पर भारत सरकार और विभिन्न संस्थाओं ने सम्मानित किया:

  • पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण — देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान
     
  • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार — नाट्य कला के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए
     
  • कालिदास सम्मान — मध्य प्रदेश सरकार द्वारा
     
  • राष्ट्रीय नृत्य गुरु सम्मान — उभरते और वरिष्ठ गुरुओं को
     
  • उत्तर प्रदेश लोक कला सम्मान — स्थानीय संस्कृति को सहेजने वालों को

कथक में क्या-क्या जोड़ा गया समय के साथ

कथक एक जीवित कला है — ये हर दौर के साथ नया रंग पकड़ती रही है:

  • अभिनय और भाव को अब और गहराई से जोड़ा गया है।
     
  • तत्कार (पांव की थाप), तोड़ापरनटिहाईअमद जैसी रचनात्मक चीज़ें शामिल हुई हैं।
     
  • घुंघरुओं की संख्या बढ़ी है। कई कलाकार अब 100 से ज़्यादा घुंघरू पहनते हैं।
     
  • फ्यूज़न के ज़रिए कथक अब पॉप, जैज़, और आधुनिक डांस फॉर्म्स से भी जुड़ रहा है।

लखनऊ घराना

  • भाव-प्रदर्शन में नज़ाकत और अदब
     
  • पंडित बिरजू महाराज, शंभु महाराज जैसे नाम इससे जुड़े हैं

2. जयपुर घराना

  • लयकारी और तेज़ पांव की थापों पर ज़ोर
     
  • राजेंद्र गंगानी इस घराने के प्रमुख कलाकार हैं

3. काशी (बनारस) घराना

  • भक्ति, भाव और सहजता की मिसाल
     
  • सितारा देवी जैसे नाम से ये घराना पहचाना गया

4. रायगढ़ घराना

  • संगीत और ताल के साथ प्रयोग करने वाला नया लेकिन महत्वपूर्ण घराना
     
  • इस घराने ने कथक में नवीनता लाई है
नम्रता राय ने कथक से जीता लोगों का दिल

आज कथक सिर्फ़ भारत तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का एक चमकता हुआ चेहरा बन गया है। अमेरिका, जापान, यूरोप और अरब देशों में कथक सिखाने वाले स्कूल खुल गए हैं। कई विदेशी कलाकार भी अब इसे सिख रहे हैं और भारत आकर इसकी असली तालीम ले रहे हैं।

कथक सिर्फ एक नृत्य नहीं, ये एक चलती-फिरती तहज़ीब है। इसमें मंदिरों की भक्ति है, दरबारों की शान-ओ-शौकत है, और आज के मंच की ग्लोबल रौशनी भी। उत्तर प्रदेश की सरज़मीं से निकलकर ये फ़नकारों की मेहनत और मोहब्बत से पूरी दुनिया में फैल गया।
यह वो रक़्स है जिसमें हर थाप के साथ एक दास्तान होती है, हर चक्कर के साथ एक भावना। यह भारत की आत्मा को स्पंदित करता है और आने वाली नस्लों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने की एक ज़िंदा मिसाल है। 

ये भी पढ़ें: भारत के लोक नृत्य: उत्सव, परंपरा और कला का संगम

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।







LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

Manipur Woman Turns Flower Waste Into Award Winning Enterprise

The flowers were rotting in the fields. Transportation had...

Sheikhgund: Kashmir’s Tobacco-Free Village

In Kashmir, a young teacher's relentless campaign turned a...

Qurratulain Hyder: An Unmatched Voice in Urdu Fiction

Qurratulain Hyder, who began crafting stories at age 11,...

Indian Female Streamers Transform Gaming Industry Landscape

New Delhi, April 11, 2024 Twenty-six-year Payal Dhare sat...

Kerala Teacher Lathika Suthan Builds ₹40,000 Monthly Business Growing Lotus Plants

In Thrissur, Kerala, former primary school teacher Lathika Suthan...

Topics

Manipur Woman Turns Flower Waste Into Award Winning Enterprise

The flowers were rotting in the fields. Transportation had...

Sheikhgund: Kashmir’s Tobacco-Free Village

In Kashmir, a young teacher's relentless campaign turned a...

Qurratulain Hyder: An Unmatched Voice in Urdu Fiction

Qurratulain Hyder, who began crafting stories at age 11,...

Indian Female Streamers Transform Gaming Industry Landscape

New Delhi, April 11, 2024 Twenty-six-year Payal Dhare sat...

Kerala Teacher Lathika Suthan Builds ₹40,000 Monthly Business Growing Lotus Plants

In Thrissur, Kerala, former primary school teacher Lathika Suthan...

Chennai Couple Quit Banking Jobs for Forest Conservation

While most professionals in their early thirties focus on...

Fighting Cybercrime Across Borders

The FBI and Indian law enforcement work together to...

Urdu Poetry’s Holi Words Unite Cultural Traditions

When Mughal emperor Bahadur Shah Zafar threw coloured powder...

Related Articles